चिकित्सा विभाग हुआ विफल जिले में महामारी बना स्वाइन फ्लू ,लोगो को मारने के गोरख धंधे में जुटा चिकित्सा विभाग ,कलक्टर की भी मौन सहमति ?
जिले में स्वाइन फ्लू बेकाबू होकर विकराल होता हुआ नजर आ रहा है। चिकित्सा विभाग इस जानलेवा बीमारी के वायरस को फैलने से रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। वही इस मामले में बाड़मेर जिला कलक्टर सहित पूरे प्रशासन ने इस मामले में आँखे मूँद रखी है। जिसके चलते हालत इतने बेकाबू हो गए है की जिले में अब तक जहां दर्जन भर से ज्यादा लोगो की मौत हो चुकी ये तो महज सरकारी आंकड़े है जो केवल जिला अस्पताल से जुटाए गए है अगर इन आंकड़ों में गुजरात एवं अन्य स्थानों पर इलाज के लिए सीधे गए लोगों की मौतो का आंकड़ा मिला दिया जाए तो इसके डरावना सच सामने आएगा। जो चिकित्सा महकमे जिला प्रशासन की नाकामी सामने आ जाएगी। जिले में बिगड़ी हुई चिकत्सा व्यवस्था के चलते गाँवों में हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे है। जिला अस्पताल में अब तक के आंकड़ों की बात की जाए तो जिले में बीते दो दिनों में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। अब तक 23 संदिग्ध मरीजों की जांच में 16 मरीजों में स्वाइन फ्लू का वायरस पाया है। जिनका जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में इलाज चल रहा है।
थार में ठिठुरन का दौर जारी है पारे में हो रही लगातार गिरावट से स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैल रहा है। बाड़मेर जिले अस्पताल में चिकित्सकों के चेंबर के आगे मौसमी बिमारीयो के मरीजों की भीड़ लगी हुई पड़ी है। घंटो के इंतजार के एक मरीज डाक्टर के पास अपना नंबर लगा पा रहा है। ऐसे में आगामी दिनों में हालात और ज्यादा बिगड़ने के पूरे आसार है। ऐसे में चिकित्सा महकमे को स्वाइन फ्लू को रोकने को लेकर युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। गाँवों में स्क्रीनिंग और टेमी फ्लू को लोगो तक पहुंचाने से ही इन आंकड़ों पर लगाम लगाई जा सकती है।